
नर्मदा तट पर ओम्कारेश्वर में मुझे एक लंबे समय तक रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। जिससे मुझे इस प्रपात के सौन्दर्य की झलक प्राप्त हुई। पहले बचपन में कभी – कभी श्री अमृतलाल वेगड़ द्वारा लिखित लेख तथा उनके नर्मदा परिक्रमा वृतांतों के शब्द चित्रों ने सम्मोहित किया। न्यूनतम शब्दों में कहूं तो श्री वेगड़ एक चित्रकार एवं लेखक हैं। उन्होंने नर्मदा के सौंदर्य को रेखाचित्रों में ढाला है पर शब्द चित्र भी ऐसे के जैसे तस्वीर सामने दिखाई देती हो। उनकी नर्मदा पर लिखित दो पुस्तकें “सौंदर्य की नदी नर्मदा” तथा “अमृतस्य नर्मदा” आजकल कम्प्यूटर के जमाने में वरचुअल यात्रायें करातीं हैं वो भी बिना कम्प्यूटर का उपयोग किये ।
नर्मदा एक पवित्र नदी है जिसकी पवित्रता का वर्णन शास्त्रों मे किया गया है परन्तु नर्मदा नदी पवित्र नदी होने के साथ अत्यंत दर्शनीय है।
इस नदी की यात्रा घने साल वृक्षों से आच्छादित अमरकन्टक से प्रारम्भ होती है। फिर एक सफ़र शुरु होता है जो पथरीले पहाड़, घने जंगल, खेत, गांव, नगर, घाटों से होकर भरुच में समाप्त होता है। नदी का स्वरूप कहीं छोटा कहीं विशाल, कहीं गंभीर कहीं चंचल, कहीं संकरा कहीं चौड़ा होता है। वो कहीं भीड़ भरे घाट तो कहीं निर्जन, कहीं काली चट्टानें तो कहीं शुभ्र धवल चट्टानों से गुजरती है। यात्रा के 1300 कुछ किलो मीटर में इतनी विविधता, हर स्वरूप में अप्रतिम सुंदर।
क्रमश:
1 comment:
bahut sudar varnan sir
mat shri narmade har
aapne parikrama ki hai kya
matra raksha seva sangthan omkareswhar
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