Friday, November 28, 2008

धाराजी एक स्मृति - 6


यह प्रपात दिन में जैसा खूबसूरत दिखाई पड़ता है। वैसा ही पूर्णिमा की रात मे भी दिखाई पड़ता है। मैने और मेरे साथियों ने चंद्रमा की रोशनी में जो दृश्य देखा था वह अब भी आंखों मे तैरता रहा है।


धाराजी के तट पर कई मेलों का आयोजन होता है। यहां पर चैत्र मास की अमावस्या पर भूतड़ी अमावस्या का मेला लगता है। तांत्रिक तथा भूत प्रेत बाधा ग्रस्त रोगियों का एक सम्मेलन होता था। इस दिन तांत्रिक पानी में डूबें हुये रहकर प्रेत बाधा दूर करने की तांत्रिक क्रियाएं करते थे। अमावस्या की रात इन क्रियाओं के लिये उपयुक्त मानी जाती है। अब इसमें कितना सच है और कितना झूठ यह तो वो तांत्रिक जाने या प्रेत बाधा ग्रस्त रोगी।

ऐसे ही एक आयोजन के दौरान जलस्तर बढ़ने से कुछ लोग अपनी जान गवां बैठे थे। तब इस स्थान का नाम अखबारों और टीवी में खूब आया था। परन्तु ना अब वो स्थान है ना वो अखबारों की सुर्खियाँ।

धाराजी का आखिरी मेला जो एक प्राचीन परम्परा का अंत था और इस प्रकृति चित्र के मंचन का पटाक्षेप भी, उसके कुछ चित्र इतिहास की अमिट यादों के रुप में –

-- धाराजी को आखिरी प्रणाम --

पुनश्च – इस कथा को जब लिख चुका तो मेरी बेटी ने कहा – ये तो आप वेगड़गिरी कर रहे हो।

3 comments:

Unknown said...

जय धारा मैया
इस स्थान से मेरे गुरु देव की कई स्म्रतियां जुड़ी हुई है।इस स्थान के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया था।2005 की उस घटना से गुरुदेव भगवान स्तब्ध थे।व उसी वर्ष उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए थे।
धारा मैया की उस पावन स्म्रति को प्रणाम।व गुरु महाराज को नित वन्दन।

Unknown said...

जय धारा मैया
इस स्थान से मेरे गुरु देव की कई स्म्रतियां जुड़ी हुई है।इस स्थान के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया था।2005 की उस घटना से गुरुदेव भगवान स्तब्ध थे।व उसी वर्ष उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए थे।
धारा मैया की उस पावन स्म्रति को प्रणाम।व गुरु महाराज को नित वन्दन।

Amod Thosar Can i know precise location of Laghu Ajan vruksh said...

Sir, Can I speak with you. Recently,myself visited twice to Dharaji. Also met to Mansingh. My email, thosar16@gmail.com 9869212521